खामोशी से फैल रहा है 'किलर इबोला'! WHO का सनसनीखेज दावा- जितने मरीज दिख रहे हैं, असली संख्या उससे कई गुना ज्यादा
नई दिल्ली: दुनिया अभी तक कोविड-19 महामारी के प्रभाव से पूरी तरह उबर भी नहीं पाई है कि अब एक और खतरनाक वायरस ने वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इबोला वायरस को लेकर गंभीर चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि वर्तमान प्रकोप में जितने संक्रमित आधिकारिक रूप से सामने आए हैं, वास्तविक संख्या उससे कई गुना अधिक हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि संक्रमण कई इलाकों में बिना पहचान के फैल रहा है, जिससे आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
हाल के दिनों में अफ्रीकी देश कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) में इबोला के मामलों में तेजी से वृद्धि देखी गई है। WHO के अधिकारियों ने बताया कि नए मरीजों में से बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जिनका पहले से ज्ञात संक्रमितों से कोई सीधा संपर्क नहीं मिला। यही तथ्य स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए सबसे अधिक चिंता का कारण बन गया है।
WHO ने क्यों जताई चिंता?
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, नए संक्रमितों में लगभग 80 प्रतिशत मामलों का पहले से दर्ज संक्रमित मरीजों से कोई स्पष्ट संबंध नहीं मिला। इसका मतलब यह हो सकता है कि वायरस समुदाय के भीतर चुपचाप फैल रहा है और कई संक्रमित लोगों की अभी तक पहचान ही नहीं हो सकी है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि वास्तविक संक्रमितों की संख्या आधिकारिक आंकड़ों से दो से चार गुना तक अधिक हो सकती है। यदि यह अनुमान सही साबित होता है तो संक्रमण की वास्तविक स्थिति कहीं अधिक गंभीर हो सकती है।
WHO ने स्थानीय प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों से निगरानी बढ़ाने, अधिक से अधिक लोगों की जांच करने और संपर्क में आए लोगों की पहचान करने की अपील की है।
आखिर क्या है इबोला वायरस?
इबोला वायरस दुनिया के सबसे घातक वायरसों में से एक माना जाता है। यह वायरस पहली बार वर्ष 1976 में अफ्रीका में सामने आया था। इसका नाम कांगो की इबोला नदी के नाम पर रखा गया था, जहां इस बीमारी का पहला बड़ा प्रकोप दर्ज किया गया था।
यह बीमारी मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के खून, शरीर के अन्य तरल पदार्थ या संक्रमित वस्तुओं के संपर्क में आने से फैलती है। संक्रमित जानवरों, विशेष रूप से चमगादड़ और कुछ जंगली जानवरों से भी इसका संक्रमण मनुष्यों में पहुंच सकता है।
कैसे फैलता है संक्रमण?
इबोला वायरस हवा के माध्यम से सामान्य फ्लू की तरह नहीं फैलता, लेकिन संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क में आने से इसका खतरा बहुत अधिक होता है।
संक्रमण के प्रमुख कारणों में शामिल हैं—
संक्रमित व्यक्ति के खून का संपर्क
उल्टी, लार या पसीने के संपर्क में आना
संक्रमित कपड़े या बिस्तर का उपयोग
संक्रमित शव के अंतिम संस्कार के दौरान संपर्क
संक्रमित जानवरों के संपर्क में आना
क्या हैं इसके प्रमुख लक्षण?
इबोला के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे दिखाई दे सकते हैं, लेकिन बाद में यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।
मुख्य लक्षण इस प्रकार हैं—
तेज बुखार
सिरदर्द
मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द
अत्यधिक कमजोरी
गले में दर्द
उल्टी और दस्त
पेट दर्द
त्वचा पर चकत्ते
गंभीर मामलों में आंतरिक और बाहरी रक्तस्राव
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय पर इलाज न मिले तो यह बीमारी जानलेवा साबित हो सकती है।
क्यों बढ़ रही है चिंता?
WHO के अधिकारियों के अनुसार, इस बार सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कई संक्रमित मरीजों की पहचान समय पर नहीं हो पा रही है। जिन लोगों में संक्रमण पाया जा रहा है, उनमें से अधिकांश का पहले से ज्ञात संक्रमित मरीजों से कोई संपर्क रिकॉर्ड में नहीं मिला।
इसका अर्थ यह हो सकता है कि वायरस कई गांवों और समुदायों में बिना किसी निगरानी के फैल चुका है।
यदि समय रहते संक्रमण की श्रृंखला नहीं रोकी गई तो यह अन्य क्षेत्रों तक भी पहुंच सकता है।
स्वास्थ्य एजेंसियां क्या कर रही हैं?
इबोला के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्थानीय सरकार और WHO मिलकर कई कदम उठा रहे हैं।
इनमें शामिल हैं—
संक्रमित मरीजों को अलग रखना
संपर्क में आए लोगों की पहचान करना
टीकाकरण अभियान तेज करना
गांव-गांव स्वास्थ्य टीम भेजना
लोगों को जागरूक करना
सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाना
विशेषज्ञों का कहना है कि जितनी जल्दी संक्रमित लोगों की पहचान होगी, उतनी जल्दी संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ा जा सकेगा।
क्या इबोला का इलाज संभव है?
पिछले कुछ वर्षों में इबोला के इलाज में काफी प्रगति हुई है। अब कुछ प्रभावी दवाएं और वैक्सीन उपलब्ध हैं, जिनसे मृत्यु दर को कम करने में मदद मिली है।
हालांकि, अभी भी इस बीमारी का सबसे प्रभावी उपाय समय पर पहचान, तत्काल इलाज और संक्रमित व्यक्ति को दूसरों से अलग रखना माना जाता है।
क्या भारत के लिए भी खतरा है?
फिलहाल भारत में इबोला का कोई सक्रिय प्रकोप नहीं है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि घबराने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय यात्रा और वैश्विक आवाजाही को देखते हुए सतर्क रहना जरूरी है।
भारत के हवाई अड्डों और स्वास्थ्य एजेंसियों द्वारा पहले भी इबोला प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों की निगरानी की जाती रही है।
यदि किसी व्यक्ति ने प्रभावित क्षेत्र की यात्रा की हो और उसमें तेज बुखार या अन्य लक्षण दिखाई दें तो उसे तुरंत स्वास्थ्य विभाग से संपर्क करना चाहिए।
बचाव के लिए क्या करें?
विशेषज्ञ निम्नलिखित सावधानियां अपनाने की सलाह देते हैं—
संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से बचें।
हाथों को साबुन या सैनिटाइजर से नियमित साफ करें।
बीमार व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों के सीधे संपर्क में न आएं।
प्रभावित देशों की यात्रा के दौरान स्वास्थ्य संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करें।
तेज बुखार, कमजोरी या अन्य संदिग्ध लक्षण होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
अफवाहों पर विश्वास करने के बजाय केवल स्वास्थ्य एजेंसियों की आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें।
वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती
कोविड-19 महामारी के बाद दुनिया पहले से कहीं अधिक सतर्क है। WHO का मानना है कि यदि इबोला के मामलों की समय रहते पहचान नहीं हुई तो यह स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था पर भारी दबाव डाल सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि महामारी जैसी स्थिति से बचने के लिए शुरुआती चरण में ही निगरानी, जांच और टीकाकरण बेहद महत्वपूर्ण हैं।
इबोला वायरस का वर्तमान प्रकोप दुनिया के लिए एक नई चेतावनी बनकर सामने आया है। WHO का कहना है कि आधिकारिक आंकड़ों से कहीं अधिक लोग संक्रमित हो सकते हैं और कई मामलों की अभी तक पहचान नहीं हो सकी है। यही वजह है कि स्वास्थ्य एजेंसियां निगरानी बढ़ाने, संपर्कों का पता लगाने और टीकाकरण अभियान को तेज करने पर जोर दे रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता, समय पर जांच और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां अपनाकर इस गंभीर बीमारी के प्रसार को काफी हद तक रोका जा सकता है। फिलहाल घबराने की नहीं, बल्कि सतर्क रहने और केवल विश्वसनीय स्वास्थ्य स्रोतों से जानकारी लेने की आवश्यकता है।

कोई टिप्पणी नहीं